जामवंत कौन थे ? क्या वह आज भी जीवित है ? - Ethiclogy

जामवंत कौन थे ? क्या वह आज भी जीवित है ?

जामवंत को ऋक्षपति भी कहा जाता है यह ऋक्ष बाद में बदलकर रिछ हो गया था जिसका मतलब भालू होता है. कहा जाता है कि एक भालू की आकृति वाले जामवंत एक दिव्य पुरुष थे, जिन्हें स्वयं ब्रह्मा ने इस धरती पर भेजा था।

हिन्दू दस्तावेजों में यह बात उल्लिखित है कि पौराणिक काल में बहुत सी ऐसी नस्लें थीं जो मानव से भी कहीं ज्यादा बुद्धिमान और विकसित थीं। जामवंत उसी नस्ल के सदस्य थे। इसके अलावा वानर और किमपुरुष भी उसी विकसित नस्ल में शामिल थे।

शास्त्रों के अध्ययन से पता चलता है कि वशिष्ठ, अत्रि, विश्वामित्र, दुर्वासा, अश्वत्थामा, राजा बलि, हनुमान, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम, मार्कण्डेय ऋषि, वेद व्यास और जामवन्त आदि कई ऋषि, मुनि और देवता सशरीर आज भी जीवित हैं।

कहते हैं कि जामवन्तजी बहुत ही विद्वान् हैं। वेद उपनिषद् उन्हें कण्ठस्थ हैं। वह निरन्तर पढ़ा ही करते थे और इस स्वाध्यायशीलता के कारण ही उन्होंने लम्बा जीवन प्राप्त किया था। परशुराम और हनुमान के बाद जामवन्त ही एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके तीनों युग में होने का वर्णन मिलता है और कहा जाता है कि वे आज भी जिंदा हैं।

लेकिन परशुराम और हनुमान से भी लंबी उम्र है जामवन्तजी कि क्योंकि उनका जन्म सतयुग में राजा बलि के काल में हुआ था। परशुराम से बड़े हैं जामवन्त और जामवन्त से बड़े हैं राजा बलि। कहा जाता है कि जामवन्त सतयुग और त्रेतायुग में भी थे और द्वापर में भी उनके होने का वर्णन मिलता है।

जामवंत को भले ही एक भालू के तौर पर देखा जाता है लेकिन असल में वे एक भालू नहीं थे क्योंकि उनकी पुत्री जामवंती का विवाह कृष्ण के साथ संपन्न हुआ था। कृष्ण से विवाह करने के बाद वह उनके महल की सभी रानियों में से एक थी।

इतना ही नहीं जामवंती और कृष्ण का एक पुत्र भी था सांब, जो कृष्ण के देह त्यागने के बाद उनका इकलौता वारिस था। सांब के ही पुत्र वज्रनाभ ने ही द्वारका नगरी के समीप कृष्ण के प्रसिद्ध मंदिर की स्थापना की थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *