सोमवती अमावस्या अन्य अमावस्याओं से अधिक महत्वपूर्ण क्यों होती है ? - Ethiclogy

सोमवती अमावस्या अन्य अमावस्याओं से अधिक महत्वपूर्ण क्यों होती है ?

कहा जाता है कि यदि कोई अमावस्या सोमवार के दिन पडती है तो उसे सोमवती अमावस्या माना जाता है जो अन्य से अधिक महत्वपूर्ण होती हें, क्योकि ऐसा साल में एक या दो बार ही होता है परन्तु अब कलयुग मैं तो यह साल में कई बार पड़ जाती है जो संकेत है की जल्दी ही घोर कलयुग भी आएगा।

इस दिन का महत्व हमारे ग्रंथों में अधिक बताया गया है। इस दिन विवाहित स्त्रियाँ अपने पति के लिए व्रत रखती है इस दिन पितृदोष का भी निवारण होता है कहा जाता है कि इस दिन व्यक्ति को मौन व्रत करना चाहिए कहते है कि मौन रहने से सहस्त्र गोदान का फल मिलता है, और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान का अधिक महत्व होता है।

सोमवार का दिन शिवजी का दिन होता है इसलिए इस दिन विशेषकर उनकी पूजा और अभिषेक करना चाहिए। इस दिन महिलाएं तुलसी और पीपल की 108 परिक्रमा लगती है और धान,पान, हल्दी से पूजा करती है। महाभारत में भीष्म पितामह ने पांडव पुत्र युधिष्ठिर को इस दिन का महत्व समझाया था। उन्होंने कहा था कि, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने वाला मनुष्य समृद्ध, स्वस्थ्य और सभी दुखों से मुक्त होगा।

अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है और पत्तों को तोड़ता है उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है। इसका उल्लेख विष्णु पुराण में भी किया गया है। ऐसा भी माना जाता है कि स्नान करने से पितरों कि आत्माओं को शांति मिलती है।

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